5 बेहतरीन हनुमान जी की कहानियां || Hanuman Ji Ki Kahani In Hindi
Hanuman ji ki kahani in hindi हनुमान जी को शक्ति, भक्ति और निष्ठा का प्रतीक माना जाता है। वे भगवान श्रीराम के सबसे बड़े भक्त हैं और अपने पराक्रम, विनम्रता और समर्पण से सम्पूर्ण संसार को प्रेरित करते हैं। हनुमान जी की जीवन गाथा में अनेक अद्भुत घटनाएँ हैं जो हमें धर्म, साहस और सेवा की सीख देती हैं।
हर भक्त के हृदय में हनुमान जी की कहानियाँ एक विशेष स्थान रखती हैं। बाल्यकाल से लेकर रामायण के युद्ध तक, हर प्रसंग में उनकी असाधारण शक्ति और भक्ति का दर्शन होता है। आइए जानते हैं हनुमान जी से जुड़ी पाँच सबसे प्रसिद्ध और प्रेरणादायक कहानियाँ, जो आज भी हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भर देती हैं।
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Contents
- 1 5 बेहतरीन हनुमान जी की कहानियां || Hanuman Ji Ki Kahani in Hindi
- 2 1. हनुमान जी के बचपन की कहानी || Hanuman Ji Ki Kahani
- 3 हनुमान जी के बचपन की कहानी
- 4 2. हनुमान जी की लंका-दहन कथा || Hanuman Ji Ki Kahani
- 5 हनुमान जी के बचपन की कहानी
- 6 3. समुद्र पार करने की कथा || Hanuman Ji Ki Kahani
- 7 समुद्र पार करने की कथा
- 8 4. संजीवनी बूटी लाने की कथा || Hanuman Ji Ki Kahan
- 9 समुद्र पार करने की कथा
- 10 5. श्रीराम के प्रति हनुमान जी की भक्ति || Hanuman Ji Ki Kahani
- 11 समुद्र पार करने की कथा
5 बेहतरीन हनुमान जी की कहानियां || Hanuman Ji Ki Kahani in Hindi
हनुमान जी की कहानी हिंदी में पढ़ें – बाल हनुमान की सूरज को निगलने की कथा से लेकर लंका-दहन और श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति तक, जानिए हनुमान जी के जीवन की प्रेरणादायक कहानियाँ।

1. हनुमान जी के बचपन की कहानी || Hanuman Ji Ki Kahani
हनुमान जी के बचपन की कहानी जानिए – कैसे छोटे हनुमान ने सूरज को फल समझकर निगल लिया, इंद्रदेव के वज्र से घायल हुए और देवताओं से असीम शक्तियाँ प्राप्त कीं। पढ़ें हनुमान जी की अद्भुत बाल कथा।
हनुमान जी के बचपन की कहानी
एक बार की बात है, जब हनुमान जी छोटे थे, तब वे अत्यंत चंचल और जिज्ञासु बालक थे। एक दिन सुबह-सुबह जब उन्होंने आकाश में लाल-लाल चमकता हुआ सूर्य देखा, तो उन्हें लगा कि यह कोई स्वादिष्ट फल है। उन्होंने सोचा — “कितना सुंदर और चमकदार फल है, मैं इसे खा लेता हूँ।
इतना सोचकर वे हवा में उड़ चले और सीधे सूर्य की ओर बढ़ने लगे। उनके इस प्रयास से समस्त देवता चिंतित हो गए, क्योंकि हनुमान जी सूर्य के बहुत पास पहुँच गए थे। जब सूर्य ने तेज़ गर्मी से उन्हें रोकने की कोशिश की, तब भी वे नहीं रुके।
यह देखकर इंद्रदेव क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने वज्र से हनुमान जी पर प्रहार कर दिया। वज्र लगने से हनुमान जी पर्वत पर गिर पड़े और बेहोश हो गए। यह देखकर उनके पिता पवनदेव अत्यंत दुखी और क्रोधित हो गए। उन्होंने अपना कार्य रोक दिया — जिससे पूरे संसार में हवा चलनी बंद हो गई।
देवताओं, मनुष्यों और जीवों का जीवन संकट में पड़ गया। तब सभी देवता ब्रह्मा जी के साथ पवनदेव के पास पहुँचे और उनसे क्षमा मांगी। ब्रह्मा जी ने हनुमान जी को जीवित किया और सभी देवताओं ने उन्हें असीम शक्तियाँ और वरदान दिए।
सूर्यदेव ने ज्ञान का वरदान दिया, इंद्रदेव ने यह आशीर्वाद दिया कि उनका वज्र अब उन्हें कभी नुकसान नहीं पहुंचाएगा, और ब्रह्मा जी ने कहा कि वे अजर-अमर रहेंगे। इस प्रकार बाल हनुमान जी को अनेक दिव्य शक्तियाँ प्राप्त हुईं और वे बन गए “अजर-अमर, चिरंजीवी और सबसे बलवान देवता” — श्री हनुमान जी।
2. हनुमान जी की लंका-दहन कथा || Hanuman Ji Ki Kahani
हनुमान जी की लंका-दहन कथा जानिए — कैसे श्रीराम के दूत हनुमान जी ने माता सीता का संदेश देने के बाद अपनी जलती पूँछ से पूरी लंका नगरी को जला दिया और रावण को उसके अहंकार का परिणाम दिखाया।
हनुमान जी के बचपन की कहानी
जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुँचे, तो उन्होंने अशोक वाटिका में सीता माता को राक्षसियों के बीच दुखी अवस्था में देखा। हनुमान जी ने श्रीराम की अंगूठी देकर उन्हें यह विश्वास दिलाया कि वे श्रीराम के दूत हैं और बहुत जल्द प्रभु उन्हें मुक्त करवाएंगे।
इसके बाद हनुमान जी ने अपनी शक्ति का परिचय देने के लिए अशोक वाटिका में विध्वंस कर दिया। उन्होंने वृक्ष उखाड़ दिए और रावण के सैनिकों को पराजित किया। तब रावण ने क्रोधित होकर अपने पुत्र मेघनाद को हनुमान जी को बंदी बनाने का आदेश दिया। मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया, जिसे हनुमान जी ने सम्मानपूर्वक स्वीकार किया और बंधन में आ गए।
रावण के दरबार में पहुँचकर हनुमान जी ने श्रीराम का संदेश दिया — “हे रावण, अब भी समय है, माता सीता को श्रीराम को लौटा दो और धर्म का पालन करो।” परंतु रावण अहंकार में डूबा रहा और उसने हनुमान जी का अपमान करते हुए उनकी पूँछ में आग लगवा दी।
जब पूँछ में आग लगाई गई, तो हनुमान जी ने अपनी शक्ति से बंधन तोड़ दिए और आसमान में उड़ गए। उन्होंने अपनी जलती हुई पूँछ से पूरी लंका में भ्रमण किया और रावण के महल से लेकर स्वर्ण-नगरी तक सब कुछ जला डाला। पूरा लंका नगरी अग्नि में जलने लगी।
इसके बाद हनुमान जी ने समुद्र के ऊपर उड़कर जल से अपनी पूँछ की आग बुझाई और फिर श्रीराम जी के पास लौटकर माता सीता का समाचार दिया। इस प्रकार लंका-दहन की यह कथा हनुमान जी की वीरता, भक्ति और प्रभु के प्रति निष्ठा का प्रतीक है।
3. समुद्र पार करने की कथा || Hanuman Ji Ki Kahani
हनुमान जी की समुद्र पार करने की अद्भुत कथा पढ़ें – कैसे जामवंत जी ने उन्हें उनकी शक्ति का स्मरण कराया और हनुमान जी ने एक ही छलांग में विशाल समुद्र पार कर लंका पहुँचकर माता सीता का पता लगाया।
समुद्र पार करने की कथा
जब भगवान श्रीराम की पत्नी सीता माता का रावण द्वारा हरण कर लिया गया, तब श्रीराम और लक्ष्मण उनकी खोज में निकले। खोज के दौरान उन्हें सुग्रीव और वानर सेना का साथ मिला। वानर सेना ने सीता माता को लंका में होने का पता लगाया, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती थी — विशाल समुद्र को पार करना।
वानर सेना के सभी योद्धा एकत्र हुए और चर्चा करने लगे कि यह समुद्र कौन पार करेगा। जामवंत जी, जो अत्यंत बुद्धिमान और ज्ञानी थे, उन्होंने हनुमान जी की ओर देखा और बोले — “पवनपुत्र हनुमान, तुम्हारे भीतर असीम शक्ति छिपी हुई है, बस तुम्हें उसे याद करने की आवश्यकता है।”
जामवंत जी के शब्द सुनकर हनुमान जी को अपने बचपन के सभी वरदान और शक्तियाँ स्मरण हो आईं। उन्होंने भगवान श्रीराम का नाम लेकर एक ही छलांग में समुद्र पार करने का संकल्प लिया। उनके आकार में दिव्य तेज प्रकट हुआ और वे पर्वत के समान विशाल हो गए।
हनुमान जी ने जोर से “जय श्रीराम” का उद्घोष किया और एक ही छलांग में सैकड़ों मील लंबा समुद्र पार कर लंका की ओर उड़ चले। मार्ग में उन्हें पर्वत, सागर की लहरें, सुरसा नामक राक्षसी और सिंहिका जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हर चुनौती का साहस और बुद्धि से सामना किया।
अंततः हनुमान जी लंका पहुँच गए और माता सीता को अशोक वाटिका में राक्षसियों के बीच दुखी अवस्था में देखा। उन्होंने उन्हें श्रीराम का संदेश दिया और यह विश्वास दिलाया कि जल्द ही प्रभु उन्हें मुक्त कर लेंगे।
हनुमान जी की यह कथा हमें यह सिखाती है कि जब आत्मविश्वास, भक्ति और साहस एक साथ होते हैं, तो कोई भी कार्य असंभव नहीं रहता।
4. संजीवनी बूटी लाने की कथा || Hanuman Ji Ki Kahan
हनुमान जी की संजीवनी बूटी लाने की अद्भुत कथा पढ़ें – कैसे उन्होंने लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के लिए हिमालय पर्वत से पूरा पर्वत उठाकर श्रीराम के पास पहुँचाया। यह कहानी भक्ति, शक्ति और निष्ठा का अद्भुत उदाहरण है।
समुद्र पार करने की कथा
लंका युद्ध के दौरान जब रावण का पुत्र मेघनाद ने लक्ष्मण जी पर शक्तिबाण चलाया, तो वे गंभीर रूप से घायल होकर मूर्छित हो गए। यह देखकर श्रीराम जी अत्यंत चिंतित हो उठे। उस समय वैद्य सुशेण को बुलाया गया,
जिन्होंने बताया कि लक्ष्मण जी को बचाने के लिए “संजीवनी बूटी” नामक औषधि हिमालय की द्रोणागिरी पर्वत पर मिल सकती है, और उसे सूर्योदय से पहले लाना आवश्यक है।
हनुमान जी ने तुरंत यह जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली और आकाश मार्ग से हिमालय की ओर उड़ चले। जब वे पर्वत पर पहुँचे, तो वहाँ अनेक प्रकार की जड़ी-बूटियाँ चमक रही थीं। हनुमान जी यह पहचान नहीं पाए कि संजीवनी बूटी कौन-सी है।
समय कम था, इसलिए उन्होंने अपनी अपार शक्ति का उपयोग करते हुए पूरा पर्वत ही उखाड़ लिया और उसे लेकर लंका की ओर उड़ चले। जब वे लौटे, तब वैद्य सुशेण ने उस पर्वत से संजीवनी बूटी निकालकर लक्ष्मण जी को सुंघाई, जिससे वे तुरंत जीवित हो उठे।
पूरा लंका का मैदान “जय श्रीराम” और “जय हनुमान” के जयघोष से गूंज उठा। इस घटना से हनुमान जी की असीम शक्ति, भक्ति और समर्पण का परिचय मिलता है। वे न केवल बलवान थे, बल्कि सच्चे भक्त और सेवादार भी थे, जिन्होंने अपने प्रभु के प्रिय भाई के प्राण बचाने के लिए असंभव को संभव कर दिखाया।
5. श्रीराम के प्रति हनुमान जी की भक्ति || Hanuman Ji Ki Kahani
समुद्र पार करने की कथा
हनुमान जी की श्रीराम के प्रति भक्ति अद्वितीय और अनुपम है। वे न केवल श्रीराम के सेवक हैं बल्कि उनके सबसे बड़े भक्त भी माने जाते हैं। एक बार माता सीता ने हनुमान जी को एक सुंदर मोतीमाला भेंट में दी।
हनुमान जी ने उस माला के हर मोती को तोड़कर देखने लगे। जब सभी ने उनसे पूछा कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा – “मैं देख रहा हूँ कि क्या इन मोतियों में मेरे प्रभु श्रीराम का नाम है या नहीं।”
यह सुनकर सब लोग आश्चर्यचकित हो गए। माता सीता ने पूछा, “हनुमान, क्या तुम्हारे भीतर भी श्रीराम बसते हैं?” तब हनुमान जी ने मुस्कुराते हुए अपने वक्षस्थल को फाड़ दिया। उनके हृदय में श्रीराम और माता सीता विराजमान दिखाई दिए। यह देखकर सब लोग भाव-विभोर हो गए और हनुमान जी की भक्ति को प्रणाम किया।
इस कथा से यह सिद्ध होता है कि हनुमान जी के जीवन का हर श्वास, हर धड़कन केवल और केवल श्रीराम के नाम से भरी हुई है। उनकी भक्ति में न स्वार्थ है, न अपेक्षा — केवल निस्वार्थ प्रेम और पूर्ण समर्पण है।
यही कारण है कि हनुमान जी आज भी श्रीराम भक्तों के लिए भक्ति, निष्ठा और सेवा का सर्वोच्च उदाहरण हैं।
हनुमान जी की भक्ति से मिलने वाली सीख.
हनुमान जी की कहानियाँ हमें जीवन में सच्ची निष्ठा, विश्वास और विनम्रता का महत्व सिखाती हैं। चाहे कितनी भी कठिन परिस्थिति क्यों न हो, अगर मन में प्रभु के प्रति सच्चा विश्वास हो, तो हर असंभव कार्य संभव हो जाता है।
हनुमान जी के प्रमुख गुण और प्रेरणा.
हनुमान जी अपने साहस, समर्पण, सेवा भावना और ज्ञान के लिए जाने जाते हैं। उनकी कहानियाँ न केवल धार्मिक हैं बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में प्रेरणा देने वाली हैं — वे हमें सिखाते हैं कि शक्ति का प्रयोग सदैव धर्म और भलाई के लिए करना चाहिए।
निष्कर्ष –
हनुमान जी की कहानियाँ (Hanuman ji ki kahani in hindi) केवल पौराणिक प्रसंग नहीं, बल्कि जीवन के गहरे संदेश हैं। ये हमें सिखाती हैं कि सच्ची भक्ति, निष्ठा और साहस से हर कठिनाई पर विजय प्राप्त की जा सकती है। हनुमान जी की शक्ति में विश्वास रखने वाला कभी निराश नहीं होता। उनके आदर्श आज भी हर भक्त के जीवन को प्रेरणा और शक्ति प्रदान करते हैं।
हनुमान जी की कहानियों से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQ)
Q1. हनुमान जी की सबसे प्रसिद्ध कहानी कौन सी है?
हनुमान जी की सबसे प्रसिद्ध कहानी लंका-दहन की है, जिसमें उन्होंने अपनी जलती हुई पूँछ से पूरी लंका नगरी को जला दिया था।
Q2. हनुमान जी ने सूर्य को क्यों निगल लिया था?
बाल्यकाल में हनुमान जी ने चमकते हुए सूर्य को लाल फल समझ लिया और उसे खाने के लिए उड़ चले, जिससे पूरी दुनिया अंधकार में डूब गई थी।
Q3. हनुमान जी ने समुद्र कैसे पार किया था?
जामवंत जी ने उन्हें उनकी छिपी हुई शक्ति का स्मरण कराया, जिसके बाद हनुमान जी ने एक ही छलांग में विशाल समुद्र पार कर लंका पहुँच गए।
Q4. श्रीराम के प्रति हनुमान जी की भक्ति कैसी थी?
हनुमान जी की भक्ति निस्वार्थ और अटूट थी। उन्होंने अपने हृदय में श्रीराम और सीता माता का स्वरूप दिखाकर अपनी सच्ची श्रद्धा का प्रमाण दिया।
Q5. हनुमान जी से हमें क्या सीख मिलती है?
हनुमान जी की कहानियाँ हमें भक्ति, साहस, निष्ठा और विनम्रता की सीख देती हैं — कि जब मन में प्रभु के प्रति सच्चा प्रेम हो, तो कोई भी कार्य असंभव नहीं होता।
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