Sanjeevani Booti संजीवनी बूटी – इतिहास, महत्व, उपयोग और हनुमान जी का अद्भुत प्रसंग

भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद में कई ऐसी औषधियों का वर्णन मिलता है जिन्होंने मानव जीवन को बचाने में अमूल्य योगदान दिया है। इन्हीं में से एक है sanjeevani booti संजीवनी बूटी, जिसे पुनर्जीवन देने वाली दिव्य जड़ी-बूटी के रूप में माना जाता है। यह बूटी केवल आयुर्वेद का चमत्कार ही नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास और धर्म में भी अत्यंत पवित्र स्थान रखती है।
संजीवनी बूटी का उल्लेख सबसे अधिक रामायण में मिलता है, जहाँ हनुमान जी ने इसका संपूर्ण पर्वत ही उठाकर लाया था। माना जाता है कि यह जड़ी-बूटी शरीर में नई ऊर्जा, प्राण और शक्ति भरने की क्षमता रखती है। आज भी लोग sanjeevani booti संजीवनी बूटी के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहते हैं — इसकी पहचान, उपयोग, इतिहास और वास्तविकता को लेकर अनेक प्रश्न उठते हैं।
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Contents
- 1 2. हनुमान जी और संजीवनी बूटी (Hanuman Ji and Sanjeevani Booti)
1. संजीवनी बूटी का इतिहास (History of Sanjeevani Booti)
Sanjeevani booti संजीवनी बूटी का पहला उल्लेख
- रामायण,
- कुमारसंभव,
- और कुछ आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है।
किंवदंती के अनुसार यह बूटी हिमालय के द्रोणागिरि पर्वत (उत्तराखंड) पर पाई जाती थी। युद्ध के समय घायल योद्धाओं को पुनर्जीवित करने के लिए इसका उपयोग किया जाता था।
संजीवनी बूटी को यह नाम इसलिए मिला क्योंकि यह:
- मृतप्राय व्यक्ति में प्राण शक्ति पुनः भरने,
- शरीर में ऊर्जा जगाने,
- जीवन प्रक्रिया को पुनर्स्थापित करने की क्षमता रखती थी।
कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि यह एक दुर्लभ fluorescent (रात्रि में चमकने वाली) herb हो सकती है।
संजीवनी बूटी का फोटो –

संजीवनी बूटी कैसी दिखती है? परंपरागत मान्यताओं और वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार संजीवनी बूटी (Selaginella bryopteris) की पहचान इस प्रकार बताई जाती है:
- इसका रंग हरी काई जैसा होता है।
- पत्तियाँ छोटी, महीन और फर्न जैसी होती हैं।
- यह सूखने पर पूरी तरह मुरझा जाती है, लेकिन पानी मिलने पर कुछ ही मिनटों में फिर से हरी और जीवित हो जाती है — यही इसकी सबसे खास पहचान मानी जाती है।
- यह अधिकतर चट्टानों की दरारों और सूखी पहाड़ियों पर उगती है।
इसी पुनर्जीवित होने की क्षमता के कारण इसे “संजीवनी” नाम दिया गया है।
2. हनुमान जी और संजीवनी बूटी (Hanuman Ji and Sanjeevani Booti)
रामायण लंका में युद्ध के दौरान मेघनाद (इंद्रजीत) ने लक्ष्मण जी पर शक्तिभेद नामक अस्त्र का प्रयोग किया। इस अस्त्र ने लक्ष्मण जी को गंभीर रूप से घायल कर दिया और वे मूर्च्छित होकर जमीन पर गिर पड़े। स्थिति अत्यंत गंभीर थी — अगर सूर्योदय तक लक्ष्मण को औषधि न मिलती, तो उनका जीवन नहीं बचता।हनुमान जी तुरंत: रात में पर्वतों को पार करते हुए द्रोणागिरि पहुँचे।
लेकिन उन्हें बूटी की पहचान में कठिनाई हुई, क्योंकि वहाँ कई प्रकार की जड़ी-बूटियाँ थीं। जीवन बचाने में समय न गंवाते हुए उन्होंने पूरा पर्वत ही उठा लिया और श्रीराम की सेना के पास ले आए। संजीवनी बूटी के स्पर्श से लक्ष्मण जी पुनर्जीवित हो उठे। इस घटना ने हनुमान जी की भक्ति, शक्ति और बुद्धिमानी को अमर कर दिया।
जब वैद्य सुषेण ने पर्वत से संजीवनी बूटी निकालकर औषधि बनाई और उसे लक्ष्मण जी पर लगाया, तो क्षण भर में ही उनमें प्राण लौट आए। यह क्षण सबसे चमत्कारी और भावुक माना जाता है, जहाँ भाई की रक्षा के लिए हनुमान जी ने असंभव को संभव कर दिखाया।
3. संजीवनी बूटी कैसी होती है? (Appearance of Sanjeevani Booti)
आयुर्वेदिक विशेषज्ञों व शोधकर्ताओं के अनुसार, sanjeevani booti संजीवनी बूटी की संभावित पहचान:
- Selaginella bryopteris
- Cressa cretica
- Rhodiola imbricata
- Dendrobium species
इनमें से Selaginella bryopteris को सबसे अधिक संजीवनी बूटी माना जाता है, क्योंकि:
- यह सूखे में मुरझा जाती है और
- पानी मिलने पर फिर जीवित हो जाती है।
इसी वजह से इसे “Resurrection Plant” कहा जाता है।
संजीवनी बूटी का उपयोग किस-किस काम में होता है?
संजीवनी बूटी आयुर्वेद में अत्यंत शक्तिशाली और दुर्लभ जड़ी-बूटी मानी जाती है। रामायण के अनुसार यह मृतप्राय शरीर में भी जीवन वापस लाने की क्षमता रखती है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसे प्राणरक्षक एवं ऊर्जा-वर्धक औषधि कहा गया है।
नीचे इसके प्रमुख उपयोग दिए गए हैं—
✅ 1. शरीर में प्राण (ऊर्जा) बढ़ाने में
संजीवनी बूटी को प्राणवायु बढ़ाने वाली औषधि माना जाता है।
यह शरीर में नई ऊर्जा पैदा करने और थकान दूर करने में सहायक मानी जाती है।
✅ 2. बेहोशी या मूर्छा दूर करने में
आयुर्वेदिक कथनों के अनुसार, मूर्छा (बेहोशी) की स्थिति में संजीवनी अत्यंत प्रभावी थी।
इसी कारण रामायण में इसका प्रयोग लक्ष्मण जी को चेतना वापस दिलाने में किया गया।
✅ 3. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में
इस औषधि को प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने वाला माना जाता है।
यह शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करती है।
✅ 4. गंभीर घाव और आघात से उबरने में
संजीवनी बूटी विशेष रूप से उन स्थितियों में उपयोगी बताई गई है जहाँ —
- शरीर पर गंभीर चोट हो
- युद्ध या दुर्घटना में गहरा आघात हो
- मृत्यु जैसी स्थिति हो जाए
✅ 5. श्वसन संबंधी रोगों में
कुछ आयुर्वेदिक विवरण बताते हैं कि संजीवनी बूटी —
- सांस की कमी
- अस्थमा
- फेफड़ों की कमजोरी
में सकारात्मक प्रभाव रखती थी।
✅ 6. मानसिक शक्ति और एकाग्रता बढ़ाने में
आयुर्वेद में इसे मानसिक स्पष्टता, एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ाने वाली जड़ी बताया गया है।
5. संजीवनी बूटी का धार्मिक महत्व (Religious Significance)
- यह जीवनदायिनी शक्ति का प्रतीक है।
- भक्ति, सेवा और समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है।
- हनुमान जी के संपूर्ण पर्वत उठाने का प्रसंग आज भी प्रेरणा देता है कि “कोई भी कार्य असंभव नहीं जब इच्छा और भक्ति साथ हों।”
6. संजीवनी बूटी कहाँ पाई जाती है? (Location)
पौराणिक और ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार इसका स्थान:
- उत्तराखंड – द्रोणागिरि / डुनागिरी पर्वत
- कलींग पर्वत श्रृंखला
- हिमालय की दुस्साध्य ऊँचाइयाँ
आज तक इसके वास्तविक स्वरूप की पुष्टि नहीं हो पाई है, इसलिए इसे दुनिया की सबसे रहस्यमयी औषधि कहा जाता है।
निष्कर्ष.
Sanjeevani booti संजीवनी बूटी केवल आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी नहीं, बल्कि जीवन की ऊर्जा, आशा और पुनर्जीवन का प्रतीक है। हनुमान जी द्वारा संजीवनी बूटी लाने की कथा हमें यह सिखाती है कि सच्चा साहस, भक्ति और कर्तव्यनिष्ठा किसी भी असंभव कार्य को संभव बना सकती है। इतिहास, धर्म और आयुर्वेद — सभी में इसका स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, और आज भी यह दुनिया की सबसे रहस्यमयी और जीवनदायिनी जड़ी-बूटी मानी जाती है।
FAQ – संजीवनी बूटी
Q1. क्या संजीवनी बूटी वास्तव में अस्तित्व में है?
हाँ, आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसका वर्णन है, लेकिन आधुनिक विज्ञान अभी भी इसकी सही पहचान की तलाश में है।
Q2. संजीवनी बूटी किस पर्वत पर पाई जाती थी?
मान्यता है कि यह उत्तराखंड के द्रोणागिरि पर्वत पर पाई जाती थी।
Q3. हनुमान जी इसे क्यों लेकर आए?
लक्ष्मण जी को पुनर्जीवित करने के लिए हनुमान जी ने sanjeevani booti संजीवनी बूटी लाने हेतु पूरा पर्वत ही उठा लिया था।
Q4. संजीवनी बूटी का उपयोग किन रोगों में होता है?
ऊर्जा, रोग प्रतिरोधक क्षमता, श्वास रोग, चोट और कमजोरी में इसका उपयोग बताया गया है।
Q5. क्या Selaginella bryopteris ही संजीवनी बूटी है?
कुछ शोधकर्ता इसे संभावित संजीवनी बूटी मानते हैं, क्योंकि यह मुरझाकर भी जीवित हो उठती है।
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